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Saturday, July 17, 2021

जिद्दी चिड़िया।।

।।हर हर महादेव।।

बहुत समय पहले की बात है। एक पेड़ पर एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। चिड़िया जिस पेड़ पर रहती थीं। उस पेड़ के साइड मै एक समुद्र था।

कुछ समय बीता चिड़िया बड़ी हो गई ।और एक दिन चिड़िया ने कुछ अंडे दिए। चिड़िया बहुत खुश हुई। अब वो अंडे का अच्छे से ध्यान रखने लगी। एक दिन की बात है।चिड़िया अपने अंडे को घोंसला में छोड़कर खाना ढुंढने गई।जब वो खाना ढूंढकर आई तो उसने घोंसला मै देखा तो घोंसला मै एक भी अंडे नहीं थे।अंडे नहीं देखकर चिड़िया रोने लगी। चिड़िया अंडे को इधर _उधर ढूंढने लगी।

फ़िर चिड़िया को पता चला की वे सब अंडे समुंद्र ने अपने अंदर समा लिया था। चिड़िया को बहुत गुस्सा आया‌। और वो समुद्र के पास गई। और भारी आवाज में बोली तुम मेरे अंडे को वापस कर दो ।समुंद्र ने कहा मेरे अंदर जो भी आता है। वो कभी नहीं मिलता । चिड़िया रोने लगी फिर वो अचनाक से उठी और बोली अगर तुमने मेरे अंडे वापस नहीं किऐ तो मैं तुम्हे सुखा दूंगी।चिड़िया ने प्रण लिया जब तक समुद्र को सुखा नहीं दूंगी तब तक कुछ भी नही खाऊंगी। चाहे मेरी मौत ही क्यों ना हो जाए।

चिड़िया अपने चोंच में समुंद्र से पानी भरती जाति और फेकती जाती। यह करते करते चिड़िया को 3 दिन हो चुके थे।फिर भी समुद्र ने हार नहीं मानी। लेकिन चिड़िया ने भी ठान लिया था। जब तक समुंद्र के घमंड को तोडेगे नहीं तब तक छोड़गे नहीं।चिड़िया समुंद्र के पानी को निकालती जाति और फेकती जाति। चिड़िया को इतना सब कुछ करते देख। बाकी चिड़िया भी वहा आई और चिड़िया से कहने लगी ।अगर हम सब मिलकर भी समुंद्र के पानी को नीकालने लगे तो भी समुद्र को नहीं सूखा सकते। क्योंकि समुद्र बहुत गहरा है। फ़िर भी चिड़िया नहीं मानी ।और बोली मैंने समुंद्र को सुखाने का प्रण लिया है । इसलिए मैं समुद्र को सूखा करके रहूंगी । और चोंच से पानी फेंकने लगी। अब वो सारी चिड़िया वहा से चली गईं।और पक्षी राज ईगल के पास गए।

और ईगल को सब कुछ बताया। ईगल ने सारी बातों को ध्यान से सूना और सारी चिड़िया को आदेश दिया । सभी समुंद्र के पास आये। सभी चिड़िया और ईगल समुंद्र के पास गए। और ईगल ने आदेश दिया ।चिड़िया की मदद किया जाय। सभी चिड़िया समुंद्र के पानी को चोंच मे भरकर फेंकने लगे।

ऐसा करते करते कुछ दिन बीत गए। लेकिन समुंद्र का घमंड नही टूटा। लेकिन चिड़िया ने भी प्रण लिया था। कुछ दिन और बीत गए। अब समुंद्र को डर लगने लगा

क्योंकि समुद्र का पानी कम होने लगा था। कुछ दिन और बीते फिर एक दिन समुद्र मे से आवाज आई। मैं तुम्हारे अंडे वापस कर दूंगा। तुम सब रुक जाओ। फ़िर समुद्र ने _चिड़िया_ के अंडे वापस कर दिये। ‍और सभी चिड़िया अपने अपने घर खुशी खुशी चले गए।



_इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अगर इंसान किसी भी काम करने की ठान ले तो वो काम कर के ही रहता है। चाहे वो काम को करने में कितने भी मुश्किल क्यों ना आया। बस ठाठने की डेर है। अगर एक चिड़िया अपने अंडे के लिए समुद्र को सुखाने का प्रण ले सकती है। तो हम और आप क्यों नहीं सफलता का प्रण ले सकते है।

__लास्ट में यही कहुंगा। इन्सान जो सोच सकता है। उससे भी अच्छा कर सकता है। बस हमे अपना बेस्ट देने की कोशिश करते रहना धन्यवाद।_

3 comments:

साहसी लड़कl और उसका धार्य।।

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